
उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि अदालत “सरकार के दबाव में काम कर रही है।”
उनका कहना है कि अगर कोई कोर्ट संविधान का पालन न करे, तो वह “सुप्रीम कहलाने की हकदार नहीं।”
‘जिहाद को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है’ — मदनी
मदनी ने कहा कि आज देश में जिहाद शब्द को नकारात्मक तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि इसका मूल अर्थ “जुल्म और अन्याय के खिलाफ संघर्ष” है।
उन्होंने कहा- “जब तक जुल्म रहेगा, जिहाद रहेगा। जहां उत्पीड़न होगा, वहां जिहाद होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद, स्पिट जिहाद जैसे टर्म्स इस्लाम की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिसका किसी धार्मिक सिद्धांत से संबंध नहीं।
मुस्लिम कम्युनिटी पर बयान—कौन साथ, कौन खिलाफ?
मदनी के मुताबिक —

- 10% लोग मुसलमानों के समर्थन में हैं
- 30% लोग मुसलमानों के खिलाफ माहौल बना रहे हैं
- जबकि 60% लोग चुपचाप सब देख रहे हैं
उन्होंने इस चुप्पी को खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे समाज में दूरी और गलतफहमी बढ़ती है।
ज्ञानवापी समेत कई फैसलों पर उठाए सवाल
मदनी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी सहित कई मामलों में संविधान की अनदेखी की है। उनका कहना है कि न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए, तभी वह “वास्तव में सुप्रीम” कही जा सकती है।
देश में नई बहस—क्या बयान से माहौल गर्म होगा?
मदनी का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेज़ी से चर्चा में है। कई लोग इसे ‘ओवरस्टेटमेंट’ मान रहे हैं, तो कुछ मुस्लिम संगठन उनके समर्थन में आ गए हैं।
एक बात तय है—यह मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस का नया केंद्र बन चुका है।
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